मै एक पूर्वांचल का सामान्य लड़का हु मै बी. टेक. कर रहा हु मै बस इतना जानना चाहता हु की जो हो रहा है क्या वो सही है. मतलब कहते है की गरीबों की भीड़ में से निकला आदमी गरीबो के दर्द को समझता है इसीलिए पूर्वांचल जो की उ प्र का एक पिछाडा इलाका है के लोगो ने माननीय सुश्री मायावती जी को पूर्ण बहुमत से विजय दिलाई इन्होने सारे उ प्र से (जिसमे की पूर्वांचल भी है) के गरीबो से पैसे ऐंठ कर बस उ प्र के पश्चिमी इलाके में खर्च करके भारत की सबसे अच्छी सिटी बना रही है.वही पुरे उ प्र का बजट से ग्रेटर नोयडा में मुर्तिया लग रही है जबकि पूर्वांचल के जिलो की साफ सफाई भी नहीं हो पा रही है. और अब देखिये इतने बड़े राज्य के सारे पैसे का इस्तेमाल करके अपने उसी इलाके को अलग करना चाहती है क्योकि इनका जो इलाका था वो पुरे भारत का विकसित इलाका हो गया अब इनको पुरे उ प्र से क्या और उसपर दूसरी राजनीती ये की अगर उ प्र चार राज्यों में विभाजित हो तो इनकी पार्टी जीतेगी भारत के चार राज्यों से जिससे ये बहुत सा फायदा होगा ये सबको पता है.
ये सब मै इसलिए लिख रहा हु ताकि राजनीती में यूथ आये भले ही किसी पार्टी से या ऐसे ही निर्दलीय हो मगर इससे हम जो करेंगे वो अपने जिले के लिए करेंगे और खुद के राज्य के लिए करेंगे न की किसी एक ही जिले के लिए करंगे. आपको ये पता होगा की ग्रेटर नोएडा में लगभग ६-७ साल पहले कुछ नहीं था बस जंगल था तो उसे काटकर इतना बड़ा सहर बना जहाँ की जमीन पुरे एशिया में सबसे महँगी मिलती है वही पूर्वांचल का बनारस जिसका इतना नाम है वहा सफाई का भी कम बहुत स्लो चलता है या चलता भी नहीं. अगर एक पेड़ हम काटे तो गुनाह और ये पूरा जंगल काट दे तो कुछ नहीं क्यों.
अगर इनलोगों को पैसे कमाने है तो बिजनस करे राजनीती करके भूखो को क्यों मारते है.
मै आपको बता दू बस ये मेरी सोच है. मै एक सामान्य सा विद्यार्थी हु जिसको ये कहने का हक़ है अगर आप इससे सहमत है तो ठीक है वरना मुझे खुद लिख कर बताये की मै क्या गलत कह रहा हु.
ये सब मै इसलिए लिख रहा हु ताकि राजनीती में यूथ आये भले ही किसी पार्टी से या ऐसे ही निर्दलीय हो मगर इससे हम जो करेंगे वो अपने जिले के लिए करेंगे और खुद के राज्य के लिए करेंगे न की किसी एक ही जिले के लिए करंगे. आपको ये पता होगा की ग्रेटर नोएडा में लगभग ६-७ साल पहले कुछ नहीं था बस जंगल था तो उसे काटकर इतना बड़ा सहर बना जहाँ की जमीन पुरे एशिया में सबसे महँगी मिलती है वही पूर्वांचल का बनारस जिसका इतना नाम है वहा सफाई का भी कम बहुत स्लो चलता है या चलता भी नहीं. अगर एक पेड़ हम काटे तो गुनाह और ये पूरा जंगल काट दे तो कुछ नहीं क्यों.
अगर इनलोगों को पैसे कमाने है तो बिजनस करे राजनीती करके भूखो को क्यों मारते है.
मै आपको बता दू बस ये मेरी सोच है. मै एक सामान्य सा विद्यार्थी हु जिसको ये कहने का हक़ है अगर आप इससे सहमत है तो ठीक है वरना मुझे खुद लिख कर बताये की मै क्या गलत कह रहा हु.